आज लेटाहुआ सोच रहा था कि..मैं क्या चाहता हूँ...ज़िन्दगी में क्या पाना चाहता हूँ ...एक दो चीज़े निकल कर आय़ी जैसे कि -में अपने आप को जानना चाहता हूँ...मुझे क्या अच्छा लगता हैं ...किस(कार्य )से मैं खुद को
सबसे प्रसन्न पाताहूँ...या उस समय मैं स्यमको सबसे सहज अपने अंतर्मन के साथ पूरी लय में होता हूँ।
-जीवन कि सुन्दरता को हम तभी अनुभव कर सकते हैं जब हम शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ हों...
इसके लिए व्यायाम इत्यादि के साथ प्राणायाम और ध्यान जरूरी हैं।
-जब हम खुद को समझते हैं तो ज़िन्दगी सुलझ जाती हैं ..हम सही निर्णय ले सकते हैं जो कि हमरे
स्वाभाव और प्रकृत के अनुकूल होगा इसलिए अपने अन्तःकरण के साथ कोई द्वन्द नहीं होगा
और हम सहज रहते है
-ध्यान कि गहराईमें खुद का Mअहसूस करना है
Tuesday, March 2, 2010
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