ध्यान के लिए सहज हो कर लगो ..हमारा बाह्य मन अति चंचल है पर अंतर्मन ध्यान
में लग जाता है ..बाह्य मन की गति से विचलित मत हो वो समय लेता है ..ये मत सोचो की ध्यान
लगाने की कोसिस की पर लगा नहीं क्योंकि मन अलग अलग विषयों में घूम रहा था
अंतर्मन उस से जरूर प्रभावित होता है ..कोई भी प्रयास व्यर्थ नहीं जाता ॥
किसी भी अध्यात्मिक साधना की कसौटी है की मन हल्का होना चाहिए
सौजन्य -बाबूजी ,रामचंद्र मिसन
Monday, April 4, 2011
Subscribe to:
Comments (Atom)